सरस्वती मंत्र/Saraswati Mantra

सरस्वती मंत्र को यदि किसी भी वेदिक मंत्र के उच्चारण से पहले पढ़ा जाऐ तो माना जाता है कि मंत्र उच्चारण में होने वाली त्रुटियाँ प्रभावित नहीं करतीं। यह मंत्र न सिर्फं मंत्र उच्चारणों की त्रुटियों को स्वत: ठीक करता है, बल्कि इस मंत्र का प्रभाव और भी कई जगह लिया जा सकता है।

यदि छात्र गण इस मंत्र का उच्चारण नियमित रूप से करें तो निश्चित ही पढ़ाई करते समय ध्यान अच्छा लगेगा। यह आवश्यक नहीं है कि इस मंत्र को किसी वैदिक मंत्र के उच्चारण से पहले ही किया जाए। यह मंत्र अपने आप में एकल भी माँ सरस्वती की उपासना के लिए किया जा सकता है।

Invoking Goddess Saraswati:

Chanting of this Mantra invokes Goddess Saraswati. We recite it before chanting any other Vedic Mantra as it would take care of the effects of pronunciation errors. We recite this Mantra for various other

सरस्वती मंत्र- Represents Goddess Saraswati
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purposes. If the students or any person doing any learning activity, it would help in enhancing concentration in that activity. It is not necessary to do this Mantra only before the recitation of other Vedic Mantras. It can be done as a stand-alone invocation of Goddess Saraswati as well.

इस मंत्र का मूल अर्थ ये है कि माँ सरस्वती जो हमें बुद्धि और ज्ञान प्रदान करती हैं, उन्हें हम सादर नमस्कार करते हैं। बिना माँ सरस्वती की कृपा के हम अपने भीतर की मेधा को नहीं साध सकते हैं। शारदा माँ का आशीर्वाद हम सब पर बना रहे, हम सर्वथा यही कामना करते हैं।

The underlying meaning of this Mantra is that we pay respects to Goddess Saraswati, who gives us intelligence and knowledge. Without the mother Sharda, we would not be able to develop our potential. We pray that the blessings of Goddess Sharda always remain on us.

 

 

ऊँ प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वाजिनीवती।

धीनाम् मित्रयवतु, गणेशाय नम: सरस्वत्यै नम: श्री गुरुभ्यो नम:

हरि: ओम्।।

ऊँ शाँति, शाँति, शाँति:

ऊँ तत् सत्

Om Tat Sat

Anish Prasad

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