Category: Mantras

सरस्वती मंत्र/Saraswati Mantra

सरस्वती मंत्र को यदि किसी भी वेदिक मंत्र के उच्चारण से पहले पढ़ा जाऐ तो माना जाता है कि मंत्र उच्चारण में होने वाली त्रुटियाँ प्रभावित नहीं करतीं। यह मंत्र न सिर्फं मंत्र उच्चारणों की त्रुटियों को स्वत: ठीक करता है, बल्कि इस मंत्र का प्रभाव और भी कई जगह लिया जा सकता है। यदि

आदित्य ह्रदयम् की शक्ति और लाभ

आदित्य हृदयम् सूर्य को समर्पित एक मंत्र है। इसका उल्लेख रामायण के युद्ध काण्ड (६.१०५) में मिलता है। ऋषि अगस्त्य ने भगवान राम को अपनी थकान हटाने और रावण को हराने के लिए यह सुनाया था।

Nakshatra Sutrams

The Taittiriya Upanishad deals with the Nakshatras. This Upanishad is a part of the Krishna Yajur Veda. The Nakshatras are the collection of Stars forming a particular shape. In a rasi, each Nakshatra spans 13 degree 20 minutes in the rasi chart. There are 27 Nakshatras in the sky. (Some argue that there are 28

Aaditya Hridayam Stotram/ आदित्यह्रदयम् स्तोत्रम्

आदित्यह्रदयम् Ādityahṛdayam, is a devotional hymn associated with Aditya or the Sun God (Surya) and was recited by the sage Agastya to Rāma on the battlefield before fighting the demon king Rāvana. This historic hymn starts at the beginning of the duel between Rāma and Rāvana. Agastya teaches Rāma, who is fatigued after the long

Navagraha Suktams- Mantras & Texts

सूर्य सूक्तम् ऊँ आसत्येन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यंच। हिरण्ययेन सविता रथेनादेवो यातिभुवना विपश्यन। ऊँ अग्निं दूतं वृणीमहे होतारं विश्ववेदसम्। अस्य यज्ञस्य सुक्रतुम्। Click here to download.   चंद्र सूक्तम् ऊँ आप्यायस्व समेतु ते विश्वतस्सोम वृष्णियम्। भवा वाजस्य संगथे। Click here to download.   मंगल सूक्तम् ऊँ अग्निर्मूर्ध्दा दिव: ककुत्पति: पृथिव्या अयम्। अपांग्रेतांग्सि जिन्वति। Click here to download.

Navagraha Mantra Texts

सूर्य मंत्रः ऊँ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः।। चंद्र मंत्रः ऊँ क्लीं सोमाय नमः।। मंगल मंत्रः ऊँ हूँ श्रीं मंगलाय नमः ।। बुध मंत्रः ऊँ ऐं स्त्रीं बुधाय नमः।। बृहस्पति मंत्रः ऊँ क्लीं बृहस्पतये नमः नमः।। शुक्र मंत्रः ऊँ ह्रीं श्रीं शुक्राय नमः ।। शनि मंत्रः ऊँ ह्रीं श्रीं शनैश्चराय नमः।। राहु मंत्रः ऊँ ऐं ह्रीं राहवे नमः।। केतु मंत्रः ऊँ ऐं क्लीं केतवे नमः।।