Am I Spiritual?

The other day I was discussing with a dear friend this interesting question which often crosses our minds- “Am I Spiritual?”. One of the esteemed readers also asked a similar question through email: 

Can you please tell the combinations for spirituality in a Horoscope? I understand Astrology a bit, and I often try to find out from my natal chart if I am a Spiritual person but no definitive conclusion so far? Can you shed light on this, please?  (more…)

Karma Theory- संचित, प्रारब्ध और आगाम कर्म

D-60 (षष्ठामसा) chart के पिछले article में Dr. R C Mishra Sir ने पूछा है कि संचित और प्रारब्ध कर्म में क्या अंतर है? इस प्रश्न के उत्तर के लिए हमें कर्म theory को discuss करना होगा इसलिए एक अलग article के माध्यम से हम इसे समझते हैं।

वेदों में तीन तरह के कर्म बताऐ गए हैं- संचित, प्रारब्ध और आगाम। Wikipedia में प्रारब्ध कर्म को समझाने के लिए एक तीरंदाज की analogy दी गई है। जो तीर तरकश में हैं वह संचित कर्म है। जो तीर छूट गया है वह प्रारब्ध है और जो कमान पर चढ़ा हुआ है वह आगाम कर्म है। प्रारब्ध कर्म deterministic होता है अर्थात यदि तीर छूट गया तो फिर कोई कुछ नहीं कर सकता। Dr. B V Raman ने अपनी किताब में बताया है कि पिछले कई जन्मों के कर्मों का balance संचित कर्म है। संचित कर्म के अनुसार ही हमारे इस जीवन में oppornunities आती हैं। इन opporntunities पर हम जो निर्णय लेकर कार्यवाही करते हैं वह प्रारब्ध हो जाता है और जो हमारी planning है वह आगाम है। यह तीनों कर्म आपस में अन्तरनिहित हैं यानि intermixed हैं। एक बार यदि प्रारब्ध कर्म हमसे हो गया तो उसका नतीजा संचित कर्म में बदल जाता है। वह हमारी destiny हो जाता है। प्रारब्ध कर्म के consequence पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता। जो कमान पर तीर चढ़ा हुआ है सिर्फ उसी पर हमारा control रह जाता है। इस पर पहले चर्चा कर चुके हैं हम पुराने article में – Fate Vs Free Will.

यदि हम positive सोचते हैं, हमारे plans किसी के लिए बुराई करने या negative करने के लिए नहीं होते तो हमारा अागाम कर्म ठीक रहता है। इस वजह से जब संचित कर्म द्वारा opportunity हमारी life में आती है तो हम उसपर अच्छा निर्णय ले पाते हैं जिससे हमारा प्रारब्ध कर्म ठीक रहता है। जब प्रारब्ध ठीक रहता है तो वह एक अच्छे संचित कर्म में बदल जाता है जिसकी वजह से हमारे जीवन में फिर अच्छी opportunities आती हैं। तीनों कर्म ठीक रहने से हमारा जीवन बढ़िया चलता है। वहीं अगर हम इस cycle को उलटा करें तो एक vicious cycle में फँस जाऐंगे। खराब आगे की सोच (आगाम कर्म) होने से संचित कर्म द्वारा आई opportunity पर निर्णय खराब होगा। प्रारब्ध खराब होने से संचित खराब होगा जिससे हमारे जीवन में negativity और problems भरी opportunities आऐंगी और हम सारी ज़िदगी परेशान होते रहेंगे।

क्या कुण्डली यह बता सकती है कि मैं आध्यात्मिक हूँ या नहीं?

एक प्रिय मित्र के साथ, जिन्हें ज्योतिष में भी दिलचस्पी है, मैं इस मुद्दे पर चर्चा कर रहा था। हाल ही में, एक सम्मानित पाठक ने भी ईमेल के माध्यम से इसी विषय से जुड़ा एक प्रश्न अंग्रेज़ी में पूछा जिसका अनुवाद कुछ इस तरह से है-

क्या आप किसी कुंडली में आध्यात्मिकता के लिए संयोजनों को बता सकते हैं? मैं ज्योतिष को थोड़ा समझता हूं, और अक्सर अपनी कुण्डली से यह जानने की कोशिश करता हूँ कि मैं एक आध्यात्मिक व्यक्ति हूं या नहीं, लेकिन अब तक कोई निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाल पाया हूँ। क्या आप इस पर प्रकाश डाल सकते हैं?

(more…)

Don’t Pay Panditji for finding a shubh muhurat. Do it yourself.

हिन्दी में पढ़ने के लिए, यहाँ क्लिक करें

Namaste, 

An esteemed reader asks- 

An online site is charging Rs. 500/- for calculating Muhurthum for taking my new car out of the showroom. Is the amount justified?” 

In an earlier article on Muhurta (Click here), we had discussed the basics of how Muhurta is calculated in Astrology. We had also discussed that Muhurta calculations are based not only on the Panchanga but few other parameters are also to be looked into. 

Let us leave aside the technicals about Muhurta. We can find a good muhurta ourselves for any auspicious activity by a simple thumb rule without paying any astrologer. 

The Thumb Rule is this:

Check the time of sunrise on a day. Calculate approximately six hours from the sunrise time. This is approximately the midday time. Now we subtract 20 mins to mid day time and add 20 mins to mid day time. This 40 mins zone is the Abhijit Muhurta and the activity can be performed within this zone.

Precisely speaking, Abhijit Muhurta is the 8th period when the time between sunrise and sunset is divided in 15 periods. We get the Abhijit Muhurta Zone by subtracting 24 mins from Midday time and adding 24 mins to midday time. But let us not make it complex. Please stick to the above paragraph to find Abhijit Muhurta.   

The logic of six hours to find mid day time from the sunrise time is very simple. At the time of sunrise, the Sun and the Ascendant (Lagna) are together. The lagna is in a rasi for approximately two hours. After about six hours, the Sun would be in the 10th house from Lagna. The tenth house is the Karma Sthana and the planet of all energy -Sun present in the 10th house is considered very auspicious. 

The Muhurta arrived at by this rule of thumb would obviously not be as pristine as the one that is properly calculated through the Panchanga and other parameters, but still, it would suffice in most of the day to day life situations which do not involve any major religious activity.

So, please don’t spend any money from now on for muhurta calculations for routine day to day life events. Please calculate Abhijit Muhurta yourself for such events and stay blessed. 

मुहूर्त निकालने के लिए पंडितजी को पैसे ना दें, स्वयं मुहूर्त निकालें

For English, Please Click Here.

नमस्ते,

एक सम्मानित पाठक ने (अंग्रेजी़ में) पूछा है-

“एक ऑनलाइन साइट ने मेरी नई कार को शोरूम से बाहर ले जाने के लिए मुहूर्तम की गणना करने के लिए 500 / – रुपये की राशि चाही है। क्या इतना पैसा जायज़ है?”

मुहूर्त के बारे में पहले के एक लेख में (यहां क्लिक करें), हमने ज्योतिष में मुहूर्त की गणना कैसे की जाती है, इसपर चर्चा की थी। हमने यह भी चर्चा की थी कि मुहूर्त की गणना न केवल पंचांग पर आधारित होती है बल्कि कुछ अन्य मापदंडों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

चलिए हम मुहूर्त के विषय में तकनीकी बातों को छोड़ देते हैं। हम बिना किसी ज्योतिषी के पैसे दिए, साधारण तरीके से किसी भी शुभ कार्य के लिए स्वयं एक अच्छा मुहूर्त निकाल सकते हैं।

एक बहुत साधारण नियम यह है:

सूर्योदय का समय निकालें। यहां से लगभग छह घंटे जोड़ें। यह लगभग दोपहर का समय होगा। अब इस समय में से 20 मिनट को घटायें और 20 मिनट जोड़ें। यह 40 मिनट का समय क्षेत्र अभिजीत मुहूर्त कहलाता है और इस समय क्षेत्र में जो भी हमारा कार्य है उसे किया जा सकता है। संक्षेप में, जब सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच का समय 15 अवधियों में विभाजित किया जाता है तब 8 वीं अवधि को अभिजीत मुहूर्त कहते हैं । हम दोपहर के समय से 24 मिनट घटाकर और दोपहर के समय में 24 मिनट जोड़कर अभिजीत मुहूर्त क्षेत्र प्राप्त करते हैं।

लेकिन हमें इतनी जटिलता की आवश्यकता नहीं है। जो उपर वाला पैराग्राफ है उतने से ही हम अच्छे से अभीजीत मूहूर्त निकाल सकते हैं। सूर्योदय के समय से मध्य दिन का समय खोजने के लिए छह घंटे ही क्यों लिया जाता है उसका तर्क बहुत सरल है। सूर्योदय के समय, सूर्य और लग्न एक साथ होते हैं। लग्न लगभग दो घंटे तक एक राशी में वास करता है। लगभग छह घंटे के बाद, सूर्य, लग्न से  दसवें घर में होगा। दशम भाव कर्मभाव होता है और समस्त ऊर्जा का ग्रह सूर्य दसवें घर में मौजूद होने से बहुत शुभ माना जाता है।

इस नियम से निकाला गया मुहूर्त निश्चित रूप से उतनी समीचीन नहीं होगा जो मूहूर्त पंचांग और अन्य मापदंडों के आधार पर निकाला जाऐगा लेकिन फिर भी, यह दिन-प्रतिदिन की स्थितियों के मुहूर्त के लिए पर्याप्त है जो बहुत धार्मिक प्रकार की नहीं होती ।

इसलिए, कृपया अब से आम आयोजनों एवं कार्यों हेतु मुहूर्त की गणना के लिए कोई पैसा खर्च न करें।अभिजीत मुहूर्त की गणना स्वयं करके कार्य को उस समय में निष्पादित करें।